पीड़ित अपने आवास की दूसरी किस्त के लिए अधिकारियों के दफ्तर का काट रहे चक्कर

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मुहम्मदाबाद गोहना मऊ : पीड़ितों की मदद के लिए प्रदेश सरकार अपने मातहतों को आए दिन लगाम कसती रहती है फिर भी अधिकारी कर्मचारी अपने लापरवाह रवैया से बाज नहीं आ रहे हैं। पात्रों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए अक्सर उनके लापरवाही के चलते कुछ कागजी कमियां रह जाती है। जिससे कि लाभार्थियों को आए दिन दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है।

जिसका जीता जागता उदाहरण नगर के मोहल्ला बिचला पूरा मे हुए गैस विस्फोट की घटना से पीड़ित मोना विश्वकर्मा को देखने को मिलेगा । इसके घर में गैस फटने से जहां बड़ी बहन की मृत्यु हो गई। वहीं दो बहने बुरी तरह से झुलस गईं। जिसमें पीड़िता का इलाज आज भी वाराणसी के ट्रामा सेंटर में चल रहा है। घटना में मकान धराशाई होने से घर गृहस्ती का सामान पूरी तरह से नष्ट हो गया। पीड़िता को रहने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना अंतर्गत मकान देने के लिए फरमान जारी किया था। घटना के लगभग दो साल बाद बीते अप्रैल माह में घर बनाने के लिए डूडा विभाग द्वारा उसके खाते में 50 हजार रुपये भेज दिया गया। मोना ने अपने मकान की बुनियाद भरवा कर छोड़ दिया और आवास की दूसरी किस्त का इंतजार करती रही जब काफी समय बीत गया तो अपने पैसे की खोजबीन के लिए वह नगर पंचायत कार्यालय गई। यहां से बताया गया कि जिला मुख्यालय से पैसा रुका हुआ है। जल्द ही इसे ठीक करा कर आपके खाते में भेजवा दिया जाएगा। कई बार कार्यालय व जिला मुख्यालय का चक्कर काटने के बावजूद भी अभी तक पीड़िता के खाते में आवास की दूसरी किस्त का पैसा नहीं पहुंच पाया। जिससे कि पीड़िता आज भी खुले आसमान के नीचे रहने के लिए विवश है। मकान के पैसे के लिए वे काफी परेशान है। अधिकारी कर्मचारी सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं। पीड़िता की समस्या को कोई भी अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहा है। जिससे कि चार माह होने जा रहे हैं अब तक खाते में पैसा नहीं पहुंच पाया। पीड़िता का कहना है कि सरकार ने जितना वादा किया था उस का आधा भी पूरा नहीं किया। शासन प्रशासन के लोग मेरी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पैसे के लिए दौड़ दौड़ कर थक चुकी हूं। अब और दौड़ने की हिम्मत नहीं रह गई है।

लाभार्थी के सभी आवश्यक कागजी कोरम पूरा हो चुके हैं। डूडा विभाग द्वारा उसकी फाइल लखनऊ भेज दी गई है। जैसे ही पैसा आएगा उसके खाते में पहुंच जाएगा उसके लिए मैं अथक प्रयासरत हूं - नितेश कुमार गौरव, ईओ, वलीदपुर - मऊ

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