धरने का शुक्रवार, छात्रसंघ चुनाव की मांग पर उबला छात्रों का गुस्सा

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आजाद पत्र ब्यूरो
कुमार अम्बुजेश

गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुक्रवार का दिन खासा हंगामाखेज रहा, समाजवादी छात्र सभा के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने कुलपति से मुलाकात की लेकिन कुलपति ने चुनाव के लिए कोई आश्वासन देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद भडके छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे छात्रों ने जमकर नारेबाजी भी की, करीब दो घंटे के धरने के बाद मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने आकर छात्रों से बात की और दोबारा इस मुद्दे पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्रों ने फौरी तौर पर धरना तो समाप्त कर दिया लेकिन मांगे नहीं माने जाने की स्थिति में बडे आंदोलन की चेतावनी भी दी।

छात्रों ने प्रशासनिक भवन का गेट भी किया जाम

समाजवादी छात्र सभा ने मुख्य गेट पर धरना दिया तो छात्रनेता नारायण दत्त पाठक के नेतृत्व में छात्रों के दूसरे गुट ने प्रशासनिक भवन का गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए।छात्रों ने रिजल्ट घोषित ना होने, टाइम टेबल की अनियमितता समेत पांच सूत्रीय मांगों का मांग पत्र मुख्य नियंता को सौंपा, साथ ही मांगे ना माने जाने की सूरत में बडे आंदोलन की चेतावनी भी दी

चुनाव की मांग पर महाविद्यालय के छात्र भी आंदोलित

छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि महाविद्यालय के छात्र भी आंदोलित हैं। कुछ वक्त पहले उदित नारायण पीजी कालेज पडरौना और एसबीएम पीजी कॉलेज फाजिलनगर मे छात्र नेता चार दिन धरना दे चुके हैं, वहीं किसान पीजी कालेज सेवरही मे भी छात्रनेताओं ने ज्ञापन देकर आंदोलन की चेतावनी दी है। मंडल के दूसरे कालेजों में भी अलग अलग धरना प्रदर्शन चल रहे हैं।

गुटबाजी मे लटका छात्रसंघ का वजूद

गोरखपुर मंडल के कालेजों और विश्वविद्यालय कैम्पस मे पिछले तीन चार साल से चुनाव बाधित हैं, इसकी सबसे बडी वजह छात्रनेताओं और छात्र संगठनों की गुटबाजी है। चुनाव के लिए एक साथ मिलकर संघर्ष करने की बजाय छात्रनेता अलग अलग धरने प्रदर्शन में जुटे हैं।इतना ही नहीं राजनीतिक दलों की दखल ने भी छात्रराजनीति का गढ रहे पूर्वांचल में छात्र राजनीति की जडें खोखली की है। जिस गोरखपुर विश्वविद्यालय और सम्बद्ध महाविद्यालय की छात्र राजनीति ने देश को बडे बडे नेता दिये हैं, वहीं छात्र संघ की राजनीति अंतिम सांसें गिन रही है।

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