बोलने को सच नहीं तैयार कोई….

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बोलने को सच नहीं
तैयार कोई.
बोल दे जो
नहीं उसका यार कोई..
लत जिसे गलती से
इसकी लग गई हो
हैं न मिलते उसको
रिश्तेदार कोई..
खड़ी हो बुनियाद पर
सच के अभी भी
मिलेगी मुश्किल से ही
दीवार कोई..
झूठ का ही बोलबाला
इस कदर है
नहीं सच से आज
करता प्यार कोई..
हैं स्वयंभू रहनुमा
सारे के सारे
कर रही है मंडली
जयकार कोई..
खामखा कहते रहो
भगवान उनको
सच न बोलो, मत कहो
गद्दार कोई..

-कमला सिंह ‘तरकश’, आजमगढ़, उप्र.

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