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    चहेते फर्मों के यहां से खरीदारी करने वाले ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़ी

    जांच में पकड़े जाने पर ग्रामप्रधानों व सचिवों पर होगी कार्यवाही

    तारकेश्वर सिंह
    चंदौली। उन ग्रामप्रधानों के लिये अच्छी खबर नहीं है। अब मनमाने ढ़ग से अपने चहेते फर्मों से खरीदारी कर के ग्रामपंचायत का काम कराने वाले ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। शासन द्वारा ऐसे ग्रामप्रधानों को अपनी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए परिचित अथवा अपने रिश्तेदारों की फर्म से मैटेरियल लेकर काम कराने के लिए मना किया गया है। साथ ही उन्हें चेतावनी दी गयी है कि यदि उन्होंने ऐसा किया तो उनसे रिकवरी होनी तय है।बताया जा रहा है कि अधिकारी उन ग्रामप्रधानों व ऐसे तथाकथित सरकारी कर्मचारियों की ऐसी फर्मो का ब्यौरा जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।जिसके जरिये यह गोलमाल होता रहता है। शासन के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने इसकी पड़ताल करनी शुरू कर दिया है। विकास कार्यों में पारदर्शिता और धांधली रोकने के उद्देश्य से यह निर्णय लेते ही कई ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों में खलबली मची हुई है। बताते चले कि जनपद में ऐसे कई ग्रामप्रधान व सरकारी कर्मचारी हैं, जिनके रिश्तेदारों की अपनी फर्में हैं और वे उनसे लाखों का लेन देन भी करते है। अब उन पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। दरअसल, शासन स्तर से नगर व ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए भरपूर धनराशि भेजी जाती है, लेकिन आधा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। ग्रामप्रधानों व कर्मचारियों ने अपने परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों के नाम पर बिल्डिग मैटेरियल की सप्लाई करने वाली फर्म बना ली है। यहीं से घटिया सामग्री मंगाकर निर्माण कार्य कराते हैं।घटिया सामग्री से बनने के सड़के, भवन कुछ ही दिन बाद खराब होने लगते हैं। ऐसे में सरकारी धनराशि का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की जेब में चला जाता है। इसीलिये सरकारी धनराशि का दुरूपयोग रोकने और विकास कार्यों में गुणवत्ता की मंशा से शासन कर्मियों व प्रधानों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।ग्राम प्रधान इन फर्मों के नाम पर भुगतान दिखाकर बिना काम कराए ग्राम पंचायत के खाते से पैसा निकाल लेते हैं। इसमें सचिवों की भी संलिप्तता होती है। नौगढ़ ब्लाक में एक साल पहले ऐसा मामला आया था। ग्रामप्रधान ने सोनभद्र की एक फर्म के खाते में एक लाख से अधिक पैसे ट्रांसफर कर दिए, जबकि गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। मामला संज्ञान में आने पर डीपीआरओ के निर्देश पर ग्रामप्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस तरह के आदेश पर जिले के मुख्य विकास अधिकारी अजितेंद्र नारायण कहते हैं कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रधानों व कर्मचारियों की पड़ताल कराई जा रही है। यदि उनके परिवार के किसी सदस्य अथवा रिश्तेदार के नाम पर फर्म मिली तो कार्रवाई तय है। आगे से हर ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों को ऐसे कार्यों से बचने की कोशिश करनी चाहिये।

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