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    Homeजनपदघाघरा का जलस्तर पांच सेमी घटा,खतरा बरकरार।

    घाघरा का जलस्तर पांच सेमी घटा,खतरा बरकरार।

    मऊ ।घाघरा नदी का जल स्तर घटने के साथ ही नदी के किनारे स्थित तटवर्ती क्षेत्रो के में कटान का खतरा बढ़ गया है। बंधों और भारत माता मंदिर के पीछे दीवारों पर अब भी नदी की तेज लहरें टकरा रही हैं।मंगलवार को घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी की कमी दर्ज की गई,लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है।

    गौरीशंकर घाट पर लगे मीटर गेज पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 5 सेमी ऊपर बह रही है,जिससे ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मण्डरा रहा है।सोमवार को घाघरा का जलस्तर 70.00 मीटर रहा। मंगलवार को 5 सेमी घटकर 69.95 मीटर पर पहुच गया। घाघरा के उतार चढ़ाव को देखकर लोग कभी भी जलस्तर में वृद्धि की शंका से सशंकित हैं। घाघरा का जलस्तर घटने के बाद भी मुक्तिधाम शवदाह स्थल पर लहरे सीधे टकरा रही है।सुरक्षा में लगे बोल्डरों में दरारे भी पड़ने लगी हैं।वही भारत माता मंदिर के पीछे नदी अभी भी बेरोकलिंग कर रही है,जिससे भारत माता मंदिर पर कटान का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।साथ ही नगर के शाही मस्जिद,लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला,डीह बाबा मंदिर,दुर्गा मंदिर,खाकी बाबा की कुटी सहित अन्य ऐतिहासिक धरोहरों पर कटान का खतरा बढ़ गया है।वही घाघरा नदी की तेज धारा में तटवर्ती इलाकों के खेती की जमीन नदी में विलीन हो रही है।बहादुरपुर,पतनई गांव के खेतों में घुसे पानी से किसानों की फसले खराब हो रही है।जलस्तर घटने के साथ ही तटवर्ती नवली, सरहरा, नईबाजार, चिऊटीडांड, रामपुर धनौली, बहादुरपुर, पतनई सहित आदि तटवर्ती इलाकों में उपजाऊ भूमि कटान के मुहाने पर आ गई है।सिंचाई विभाग कटान रोकने के लिए बोल्डर गिरा कर कटान रोकने का दम्भ भर रहा है।तटवर्ती ग्रामीणों ने कहा कि सिंचाई विभाग हर वर्ष कटान रोकने व धारा मोड़ने के नाम पर करोड़ो रूपये पानी मे बहा देता है।लेकिन कटान पीड़ितों को आज तक कटान से निजात नही मिली है।लोगो ने कटान रोकने का स्थाई प्रबंध करने की मांग किया है।

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