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    Homeदेशअब सरकारी स्कूलों में भी होगी प्ले स्कूल जैसी पढ़ाई

    अब सरकारी स्कूलों में भी होगी प्ले स्कूल जैसी पढ़ाई

    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नीति से जुड़ी 10 नई पहल कीं। इनमें स्कूली बच्चों से जुड़ी पहल विद्या प्रवेश योजना भी है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में भी अब प्ले स्कूलों जैसी पढ़ाई होगी। यानी पहली कक्षा में प्रवेश से पहले बच्चों को इसके तहत तीन महीने का एक खास कोर्स कराया जाएगा। इसमें उन्हें हंसते और खेलते हुए पहली कक्षा से पहले जरूरी अक्षर और संख्या ज्ञान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने योजना को शुरू करते हुए कहा कि जब हंसी से पढ़ाई होगी तो सफलता भी मिलनी तय है।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत के भाग्य को बदलने की ताकत

    प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर देशभर के शिक्षाविदों, अभिभावकों और छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नीति को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटे लोगों का आभार जताया और कहा, ‘राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बड़े फैक्टरों में से एक है, जिसमें भारत के भाग्य को बदलने का साम‌र्थ्य है। यही वजह है कि इसे किसी भी दबाव से मुक्त रखा गया है।’

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं की सोच के अनुरूप

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं की सोच के अनुरूप है। 21वीं सदी के युवाओं को एक्सपोजर चाहिए। वह शिक्षा के पुराने बंधनों और पिंजरों से मुक्त होना चाहता है। नीति उन्हें यह भरोसा दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके और उनके हौसलों के साथ है।’ नीति में अब उनके लिए मल्टीपल एंट्री और एक्जिट की व्यवस्था की गई है।

    एकेडमिक क्रेडिट आफ बैंक स्कीम शुरू

    प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एकेडमिक क्रेडिट आफ बैंक स्कीम की भी शुरुआत की। इसमें कोई भी छात्र कभी भी बीच में पढ़ाई छोड़ सकता है और फिर शुरू कर सकता है। पढ़ाई का पूरा ब्योरा उसके एकेडमिक अकाउंट में जमा रहेगा। इनमें एक कोर्स को छोड़कर दूसरे कोर्स में दाखिला लेने का भी विकल्प मौजूद है।

    कोरोना के बावजूद नीति पर अमल के टास्क पूरे

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर उठाए गए कदमों को जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के बाद भी नीति के अमल के लिए जो टास्क तय किए गए थे, उन्हें तय समय में हासिल किया गया है। उन्होंने इस मौके पर इंजीनियरिंग कालेजों में क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई शुरू होने पर खुशी जताई और कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से युवाओं को गर्व होगा। साथ ही इससे उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव आएगा।

    दिव्यांगजनों के लिए सांकेतिक भाषा में पढ़ाई की शुरुआत

    प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों के लिए पहली से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सांकेतिक भाषा में शुरू करने की भी शुरुआत की। एनसीईआरटी ने इसे लेकर पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसके साथ ही स्कूलों में छात्र अब सांकेतिक भाषा को एक विषय के रूप में भी पढ़ सकेंगे।

    भारत के पास होगी प्रतिभाशाली लोगों की बड़ी फौज

    इस वर्चुअल कार्यक्रम को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी संबोधित किया और कहा कि नीति का सही परिणाम हमें देश की आजादी के सौ साल पूरे होने के मौके पर दिखेगा। जब हमारे पास प्रतिभाशाली लोगों की एक बड़ी फौज होगा। उन्होंने कहा कि नीति की मदद से ग्लोबल सिटीजन तैयार करने में भी मदद मिलेगी जो दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी शिक्षा और हुनर का परचम फहराएंगे। उन्होंने इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और नीति तैयार करने वाली कमेटी के प्रमुख डा. के. कस्तूरीरंगन का भी आभार जताया।

    पीएम ने ये कीं प्रमुख पहल

    • निष्ठा 2.0 : प्राइमरी के साथ माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इन्हें मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तरीके से पढ़ाई के तैयार किया जाएगा।
    • सफल : सीबीएसई स्कूलों में तीसरी, पांचवीं और आठवीं के छात्रों का आकलन अब उनकी सीखने की क्षमता के आधार पर होगा। इस दौरान उनकी परीक्षा कांसेप्ट बेस और ¨थ¨कग बेस होगी।
    • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) फार आल : इसके तहत सभी स्टेज पर छात्रों को अब कम से कम चार घंटे का एआइ का कोर्स करना होगा।
    • उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण : उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी कोर्स भी शुरू होंगे। अभी इन कोर्सो के लिए छात्र विदेश जाते थे। इसके तहत 150 संस्थानों ने अपने यहां विदेशी सेंटर खोले हैं।
    • नेशनल डिजिटल एजुकेशन आर्किटेक्चर : आनलाइन पढ़ाई के विकास के साथ इस बात पर भी जोर है कि इसमें जो भी कंटेंट हो वह बेहतर हो। इसके लिए यह कदम उठाया गया है।
    • नेशनल एजुकेशन टेक्नोलाजी फोरम : इसके जरिये सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को तकनीक मदद मुहैया कराई जाएगी। इस फोरम में देश के तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। 
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