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    आदर्श ग्राम नागेपुर में पुस्तकालय के माध्यम से बच्चों ने जलाया शिक्षा की लौ

    कोरोना काल में निःशुल्क पुस्तकालय के माध्यम सैकड़ो बच्चें कर रहे है पढ़ाई।

    अभिषेक त्रिपाठी/मिर्जामुराद

    मिर्जामुराद। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में आशा ज्ञान पुस्तकालय के माध्यम से सैकड़ों बच्चे शिक्षा की लौ जला रहे है। गौरतलब हो कि कोरोना काल में पिछले दो साल से करीब सारे स्कूल लगभग बन्द पड़े है, जिसके वजह से बच्चों की शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। गाँवों में आनलाइन क्लास करने का कोई अच्छी सुविधा नही है। गरीब बच्चे महंगी किताब खरीदने में भी असमर्थ थे, ऐसे में लोक समिति और आशा ट्रस्ट ने नागेपुर गाँव में पुस्तकालय खोलकर बच्चों की शिक्षा दीक्षा में भरपूर मदद कर रहे है। इसका नाम आशा ज्ञान पुस्तकालय दिया गया है। इस पुस्तकालय में प्राइमरी कक्षा से लेकर उच्च महाविद्यालय तक के सभी वर्ग की किताबें उपलब्ध है। जिसका भरपूर लाभ स्कूल के बच्चे ले रहे है, साथ ही गाँव के सैकड़ों बच्चे पुस्तकालय में उपलब्ध प्रतियोगी किताबों और पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे है। लोक समिति आश्रम नागेपुर में स्थापित पुस्तकालय को संस्था के कार्यकर्ता पंचमुखी जी के नेतृत्व में गाँव के ही दर्जनों बच्चे पुस्तकालय की देख भाल का जिम्मा खुद देख रहे है।
    पुस्तकालय संयोजक पंचमुखी सिंह ने बताया कि पुस्तकालय में विभिन्न विषयों से सम्बन्धी करीब पांच हजार से ज्यादा किताब उपलब्ध है। कोई भी छात्र पुस्तकालय का सदस्य बनकर पुस्तकालय से निःशुल्क किताब प्राप्त कर सकता है। नागेपुर समेत आसपास के दर्जनों गाँव से अबतक कुल 512 छात्र पुस्तकालय का सदस्य बन चुके है। ग्रामीण पुस्तकालय में पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों के साथ दैनिक समाचार पत्र व पत्रिकाएं भी उपलब्ध है। समाचार पत्र-पत्रिकाओं से स्कूल के विद्यार्थियों के साथ ग्रामीण नियमित रूप से समसामयिक विषयों की जानकारी ले रहे है।
    लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर ने बताया कि कोरोना महामारी में आशा ज्ञान पुस्तकालय ग्रामीण बच्चों के लिये वरदान साबित हो रहा है। पुस्तकालय से जुड़े कुछ गरीब बच्चों को पढ़ाई में भी मदद की जा रही है, लाकडाउन में सैकड़ों छात्रों को मास्क, सेनेटाइज किट, पौष्टिक आहार तथा किताब कापी बाँटकर मदद किया गया। समय समय पर बच्चों सामाजिक आर्थिक व अन्य मुद्दों पर प्रतियोगिता, प्रशिक्षण, काउन्सलिंग के माध्यम उनकी समझ विकसित की जाती है।

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