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    जन्मकुंडली का जीवन में क्या है महत्व जानिए प्रख्यात जोतिर्विद आचार्य पं0 धीरेन्द्र मनीषी से…




    वाराणसी। किसी भी व्यक्ति के जन्म के सही समय, तारीख एवं स्थान के आधार पर ज्योतिषीय गणित से उसकी जन्मकुंडली तैयार की जाती है जिसमें उसकी प्रकृति व स्वभाव से लेकर भविष्य तक की जानकारी होती है। जन्म पत्री के चौकोर खाने में बनी बारह घरों की आकृति जन्म कुंडली होती है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने ग्रहों के बारे में जानकारी प्राप्त कर अपने ग्रहों को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। आपकी जन्म कुंडली के आधार पर आपका पूर्व जन्म, वर्तमान और अगले जन्म तक की सारी जानकारी भी मिल सकती है। जन्म पत्री को पंचांग व कंप्यूटरीकृत दोनों माध्यम से बनवाया जा सकता है पर हस्तनिर्मित पञ्चाङ्ग से बनी कुंडली शुभ मानी जाती है। यह जीवन में सितारों और ग्रहों की चाल के विश्लेषण के माध्यम से व्यक्ति के करियर, शिक्षा, प्रेम जीवन, व्यक्तित्व और आभा को दर्शाता है। इसके पास सभी समस्याओं का समाधान है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए जन्मकुंडली एक ऐसी महत्वपूर्ण पत्री है जिसके माध्यम से उसके जीवन में आने वाली समस्याओं को हल किया जा सकता है ।जन्मकुंडली के माध्यम से ग्रहों का विवेचन किया जा सकता है। इसकी सहायता से व्यक्ति अपने महत्वपूर्ण निर्णय जैसे विवाह ,करियर ,पढ़ाई ,नौकरी और व्यापार आदि के बारे में भी बहुत कुछ जान सकता है।जन्मकुंडली व्यक्ति को अपने जीवन के प्रमुख निर्णय को लेने में सहायक होता है। इसके माध्यम से वह अपने भविष्य के लिए तैयार हो सकता है। जन्मकुंडली द्वारा लिए गए निर्णय व्यक्ति को उचाईयों की और लेकर जातें है। वह कभी किसी कार्य में असफल नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति के कुंडली में किसी प्रकार का दोष व नकारात्मकता का वास है तो उसे इस समस्या का समाधान भी जन्मकुंडली के माध्यम से ही मिल सकता है। वह जन्मकुंडली के आधार पर बताये गए व्रत , उपाय , पूजा -पाठ व जप करके सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है।

    नोट: कुंडली विश्लेषण एवं निर्माण हेतु आप आचार्य जी से मो0 9450209581/ 8840966024 पर सशुल्क संपर्क कर सकते हैं।

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