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    स्मृति शेष : श्याम चरित मानस के रचयिता साहित्यकार माधवदास हुए पंचतत्व में विलीन

    विधायक रुदौली रामचन्द्र यादव ने घर पहुँच अर्पित किया श्रद्धा सुमन
    सुल्तानपुर

    सुल्तानपुर/ सजंय सिंह।

    श्री श्याम चरित मानस महाकाव्य के रचयिता माधव दास का 22 अगस्त 2021 को शाम 7:00 बजे गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया वे 74 वर्ष के थे। जिनका साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान रहा। श्री सुभाष इंटर कालेज पलिया सुल्तानपुर में पुस्तकालय परिचारक के रूप कर्तव्य निष्ठा से पदभार निर्वहन करते हुए रिटायर हुए इनके निधन से सुल्तानपुर की धरती से एक अमूल्य निधि चली गयी सोमवार 23 अगस्त को पूर्ण सम्मान के साथ अंत्येष्ठि की गई।
    माधव दास का जन्म जनपद मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रायबरेली टाण्डा हाइवेपर स्थित देवरार भटमई पावर हाउस के पास ग्राम बनमई ब्लॉक कूरेभार सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश में 11 नवंबर 1948 में एक मध्यमवर्गीय यादव परिवार राम बरन यादव के यहाँ हुआ।यह दो भाई थे इनके बड़े भाई माले यादव के 3 पुत्र राम उजागिर,ओमप्रकाश,सत्य प्रकाश हुए। बड़े भाई माले यादव राम उजागिर और सत्य प्रकाश का दैवयोग से पहले ही स्वर्गवास हो चुका है। माधव दास के एक पुत्र पवन कुमार और पुत्रवधू शीला जो जीवन के अंतिम क्षणों में माधव दास की विधिवत सेवा सुश्रुषा किया।
    आर्थिक परेशानियों के चलते उस समय में इनकी शिक्षा अधूरी रह गई थी। मात्र दूसरी कक्षा पास माधव दास की कलम लेखन कार्य में चलती अनवरत रही। पूर्वांचल में लोग गीत फरवाही, नटवरी नृत्य, बिरहा आदि अन्य विधाओं में लोक गीतों की रचना माधव दास ने की है। इनके प्रमुख शिष्यों में शास्त्री यादव, बिरहा सम्राट छविलाल पाल, हरिप्रसाद, शिवप्रसाद, परमानंद यादव ,चौधरी, राज करन निषाद,राज बहादुर राना, जयनारायण यादव,महंगू राम पाल,विजय बहादुर यादव,ज्ञान प्रकाश विश्वकर्मा,राम अभिलाष साईं, रायबहादुर यादव, हरिपाल, छविलाल पाल, भीम यादव,रामजस,पुद्दन,अजय यादव ,बलराम यादव,लल्लन निषाद , कल्लू आदि लगभग सैकड़ों कलाकारों द्वारा गाए जाने वाले 70 प्रतिशत गीत माधव दास के द्वारा ही लिखे गये।
    इनकी छत्रछाया में कुछ शिष्य कविता लिखने में जब पारंगत हुए तो इन्होंने रामचरितमानस की तर्ज पर श्लोक,दोहा,सोरठा, छंद, चौपाई के माध्यम से श्री श्याम चरित मानस नौ खंडों गोकुल खंड, वृंदावन खंड, माधुर्य खंड, मथुरा खंड, अनुराग खंड, द्वारिका खंड, धर्मनीति खंड,ब्रम्ह खंड अवधी में लिख डाला।श्री कृष्ण पर लिखा जाने वाला महाकाव्य लगभग 11सौ दोहे और 11हजार चौपाई अपने में अनूठा है।जिसपर आधारित भागवत कथा और अखंड पाठ संकीर्तन किया जाने लगा है। वरिष्ठ साहित्यकार और प्रतिष्ठित युग तेवर पत्रिका के संपादक कमलनयन पांडे ने इन्हें आधुनिक तुलसी कहते हुए अपने आशीर्वचन में कहा कि इस तरह कलम चलती रही तो ये एक नया आयाम गढ़ेंगे। इस महान विभूति, कलमकार के श्री चरणों में शोक संतप्त परिवार, रिश्तेदार,पूरा शिष्य समूह और क्षेत्र के जनमानस ने अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। श्याम चरित मानस के टीकाकार स्व०रामबुझारत वर्मा के पुत्र शिक्षक सर्वेश कांत वर्मा समेत अन्य दर्जनों लोगों ने मृत शरीर पर पुष्पांजलि समर्पित किया इस अवसर पर अयोध्या रुदौली बिधायक रामचन्द्र यादव,पूर्ब प्रमुख कमलेश यादव मिल्कीपुर समेत सुल्तानपुर, अम्बेडकरनगर,अयोध्या, समेत अन्य जिलों से उनके शिष्य श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुँचे।

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