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    सीएमओ मऊ ने किया लाखों की हेराफेरी




    एपीआई न्यूज एजेंसी/आजाद पत्र।

    मऊ- जहां एक ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार और माफियाओं को लेकर जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है वहीं आज भी कुछ भ्रष्ट अधिकारी घोटाला और भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बात करते हैं जनपद मऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी एसएन दूबे की जिन्होंने जनपद मऊ में 8 महीने में ही भ्रष्टाचार की बड़ी इबादत लिख दी है। जी हां चाहे मातहत कर्मचारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग हो या फिर चिकित्सा प्रतिपूर्ति से लेकर दवा सप्लाई एवं कार्यक्रमों का लंच पैकेट की सप्लाई फूड कंपनियओं या फर्मों द्वारा हो या फिर स्टाफ नर्सों की ज्वाइनिंग हो! बिना पैसा लिए महोदय एक काम भी नहीं करते। हद तो तब हो गई जब इनके समकक्ष मुख्य चिकित्साधिकारी रहे सतीश सिंह से भी उन्होंने घूस ले लिया, सूत्र बताते हैं कि जब मऊ के पूर्व मुख्यचिकित्सा अधिकारी रहे सतीश सिंह से लखनऊ में डी जी कार्यालय पर मऊ के ही एक ब्यक्ति से मुलाकात हो गई तो उन्होंने बताया कि मऊ में वर्तमान सीएमओ इतना भ्रष्ट अधिकारी है कि मेरे ट्रांसफर होने के बाद अदेय प्रमाण पत्र देने के लिए मुझसे ही डेढ़ लाख घूस ले लिया। चुंकि घूस लेना और देना दोनों अपराध है, इसलिए हो सकता है मऊ के पूर्व सीएमओ जांच के दौरान अपनी बात से पलट जाएं और इसका कोई साक्ष्य न मिले, लेकिन कहा गया है कि जब पाप का घड़ा भर जाता है तो फूटता जरुर है, और अब वह दिन भी सामने आ गया क्योंकि सीएमओ मऊ एसएन दूबे ने 5 मार्च को अपनी पत्नी उषा दूबे के नाम से यूनियन बैंक वाराणसी की रथयात्रा शाखा में खाता संख्या – 360601010036926 खुलवाया और मात्र 27 दिन में ही इन्होंने उस खाते में मऊ के यूनियन बैंक नरई बांध शाखा एवं अन्य माध्यम से लगभग 40 लाख तक का नकद पेमेंट अपने चपरासी द्वारा करवा दिया।

    यही नहीं खाना सप्लाई करने वाली एवं कागज पर खानापूर्ति करके फर्मों से पैसा सीधे अपने पत्नी के अकाउंट में ट्रांसफर करवाकर सरकारी धन का लाखों का चूना लगाया। जिसका साक्ष्य बैंक स्टेटमेंट मिलने के बाद यह खबर चलाई जा रही है। अभी तो इनके एक खाते की डिटेल है यदि किसी विजिलेंस आदि कंपनियों से जांच कराई जाए तो इनके बेटे से लेकर तमाम संबंधियों के खाते में पैसा जमा करने की उम्मीद है।इनका रिटायरमेंट सिर्फ दो महीने बताया जा रहा है, इसलिए पैसे की हवस ने इनको इस कदर घेर लिया है कि अपने समकक्ष अधिकारी से भी घूस लेने में इनका न त‌ो हाथ कांपा और न हीं इनकी मानवता जागी। यह दूसरे अन्य कार्यों में क्या करते होंगे? इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। यह तो महज‌ इनके एक महीने के भ्रष्टाचार के कहानी है यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो करोड़ों की हेराफेरी सामने आ सकती है।

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