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    सरगुजा में रोहिंग्या शरणार्थी का आरोप प्रशासन के जाँच दल ने किया ख़ारिज.. कांग्रेस हुई हमलावर.. माँगा इस्तीफ़ा




    ऋषिकेश मिश्र।

    अंबिकापुर। सरगुजा में रोहिंग्या शरणार्थियों के आकर बस जाने के सनसनीख़ेज़ आरोप को प्रशासन के जाँच दल ने खारिज कर दिया है। आठ सदस्यीय जाँच दल जिसमें सीईओ ज़िला पंचायत से लेकर तहसीलदार शामिल थे उसने व्यापक जाँच के बाद निष्कर्ष के साथ रिपोर्ट सौंप दी है। इस मामले को लेकर पूर्व कांग्रेसी और मौजुदा समय में भाजपा से पार्षद आलोक दुबे ने शिकायत की थी जिसमें महामाया पहाड़ पर अतिक्रमण और रोहिंग्या शरणार्थियों को वहाँ बसाए जाने की बात कही गई थी।पार्षद आलोक दुबे के पत्र पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने अतिक्रमण जाँच और स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव ने रोहिंग्या मसले पर जाँच के लिए पत्र लिखा था। जिला प्रशासन ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री सचिवालय और स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के कार्यालय को भेज दी है।

    आठ सदस्यीय जाँच टीम जिसमें सीईओ ज़िला पंचायत, अपर कलेक्टर, डीएफ़ओ,एसडीएम, सीएसपी, कमिश्नर नगर निगम, अधीक्षक भू अभिलेख और तहसीलदार शामिल थे, इस दल ने चार बिंदुओं में निष्कर्ष दिया है। दल ने पाया है कि अतिक्रमण तो हुआ है लेकिन कुल 254 अतिक्रमणकारियों में 160 छत्तीसगढ के, 40 झारखंड 26 बिहार तथा शेष अन्य राज्यों से हैं, जाँच दल को वहाँ रोहिंग्या होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।जाँच रिपोर्ट में तत्कालीन पार्षद सरपंच का ज़िक्र करते हुए लिखा गया है कि इनके द्वारा अतिक्रमण कारियों को राशन कार्ड वोटर कार्ड आधार कार्ड बनवाने के लिए कैंप लगवाया गया जिससे अतिक्रमणकारियों को रोकने में बाधा हुई और अतिक्रमण के लिए प्रोत्साहन मिला।
    जाँच रिपोर्ट के सामने आते ही कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने रोहिंग्या शरणार्थी के बसाए जाने वाले आरोप लगाने वाले पार्षद आलोक दुबे को लक्ष्य करते हुए कहा “पूरे प्रदेश में अनावश्यक और केवल सनसनी फैलाने के लिए रोहिंग्या शरणार्थियों के अंबिकापुर में बसाए जाने का आरोप लगाने वाला पार्षद आलोक दुबे जी ने कहा था कि यदि रोहिंग्या प्रमाणित नहीं हुए तो वे इस्तीफ़ा दे देंगे.. तो इस्तीफ़ा कब दे रहे हैं”
    इधर जाँच रिपोर्ट में तत्कालीन पार्षद शफी अहमद का ज़िक्र कैंप लगवाकर आधार कार्ड राशन कार्ड बनाने के लिए किए जाने और इस आधार पर अतिक्रमण को शह दिए जाने के निष्कर्ष को MIC सदस्य द्वितेंद्र मिश्रा और AICC सदस्य तथा DCC प्रवक्ता सीमा सोनी ने प्रश्नांकित किया है। दोनों ने सवाल उठाया है “पार्षद की जवाबदेही है कि वह अपने क्षेत्र के निवासियों का आधार कार्ड राशन कार्ड मतदाता अधिकार पत्र बनवाने के लिए शासन का सहयोग करे.. कैंप इसीलिए ही लगवाएं जाते हैं.. और जो पात्र होता है उसी का राशन कार्ड बनता है यह पात्रता शासन के नियम के आधार पर तय होती है.. और इसे प्रशासन ही चेक करता है..तो यदि तत्कालीन पार्षद का दोष है कि कैंप लगवा दिया.. तो वहीं प्रशासन कैसे दोषी नहीं माना जाएगा जिसने कैंप में यह सारे कार्ड जारी कर दिए.. जाँच रिपोर्ट के आधार पर तो यही समझ आता है कि अतिक्रमणकारियों को वोटर आईडी कार्ड आधार कार्ड राशन कार्ड जारी हुआ इसका मतलब कि प्रशासनिक जाँच दल तत्कालीन कलेक्टर समेत पूरी प्रशासन की टीम को ग़लत बता रहे हैं”

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