यूपी इलेक्शन 2022:मुहम्मदाबाद विधानसभा सभा में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला के आसार। बसपा से प्रत्याशी मानवेंद्र राय जनता के बीच लोकप्रियता में सबसे आगे ।

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गाजीपुर /भांवरकोल । जनपद की सबसे चर्चित विधानसभा मुहम्मदाबाद में इस बार रोचक मुकाबला होने की संभावना है। पिछले कई चुनावों में आमने सामने की लड़ाई के बीच कभी कभी अंसारी परिवार तो कभी भाजपा से सीधा मुकाबला रहा है।अगर पिछले कई चुनाव परिणामों पर नजर डाली जाए तो अधिकांश चुनाव अंसारी परिवार के पक्ष में रहे हैं। इसके साथ ही भाजपा ने भी तीन बार जीत का स्वाद चखा है। लेकिन सत्ताधारी पार्टी एवं अंसारी बंधुओं की विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। बहरहाल जहां एक तरफ सत्ताधारी दल की वर्तमान विधायक हैं वहीं दूसरी ओर सपा से अंसारी परिवार के प्रत्याशी के भी मैदान में आने की प्रबल संभावना का अनुमान लगाया जा रहा है।   

 माधवेंद्र राय का तूफानी जनसंपर्क अभियान: शिक्षा, स्वास्थ्य,सडकों का विकास ही होगा चुनावी मुद्दा :       

मुहम्मदाबाद के दिग्गज नेता और गरीबों के हितैषी व मसीहा  रहे स्वo बीरेंद्र राय के पुत्र माधवेन्द्र राय बसपा से ताल ठोंक रहे हैं। माधवेन्द्र राय के चुनावी दंगल में उतरते ही मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। वही क्षेत्र में माधवेन्द्र ने काफी कम समय में अच्छी पैठ बना ली है। राजनैतिक जानकारों की माने तो सपा- भाजपा के प्रत्याशियों की अभी तक पार्टियों द्वारा अधिकृत रूप से प़त्याशी घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में इन दलों के वोट बैंक में भी माधवेन्द्र ने अच्छी खासी सेंधमारी कर रहे है। टिकट को लेकर प्रमुख पार्टियों के टिकट को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिसके चलते विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क से उनकी लोकप्रियता दिनोदिन बढ़ती दिख रही है जो विपक्षियों के लिए बेचैनी का सबब बनी है। इस विधानसभा में करीब एक लाख दस हजार भूमिहार मतदाता, 80 हजार दलित मतदाता और अति पिछड़ों मतदाताओं की संख्‍या भी अच्‍छी-खासी है। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे बसपा के प्रत्‍याशी माघवेंद्र राय भूमिहार, दलित और अतिपिछड़े बर्ग के मतदाताओं पर अपनी पैठ तेजी से कर रहे है। लगातार जनसंपर्क अभियान में जुटे माधवेन्द्र राय अपने दिवंगत पिता के गहन संपर्कों को सहेजने में जुटे हैं। मालूम हो कि माघवेंद्र राय के पिता रिटायर्ड दरोगा वीरेंद्र राय जो 1996 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और दूसरे स्‍थान पर रहे। 2002 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट अंतिम समय में बसपा हाईकमान ने काट दिया और वह निर्दल चुनाव लड़े। वीरेंद्र राय को करीब 20 हजार वोट हासिल हुआ। स्वo वीरेंद्र राय की पकड़ अति पिछड़ों एवं दलितों में अच्‍छी थी। कई बार इनके हक के लिए वह किसी से भी मोर्चा लेने से नहीं हिचकते थे। पिता की विरासत पर साफ-सुथरी छवि वाले माघवेंद्र राय मुहम्‍मदाबाद में क्षतिग्रस्‍त सड़कों, बदहाल स्‍वास्‍थ्‍य सेवा, शिक्षा व युवाओं को रोजगार के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका दावा है कि जनता ने यदि मौका दिया तो सालों से विकास की बाट जोह रहे मुहम्मदाबाद विधानसभा का चतुर्दिक विकास कर आदर्श विधानसभा बनाने में कोई कोर कसर नहीं उठा रखेंगे। विकास को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में कार्य कराए जाएंगे। फिलहाल माधवेंद्र अपनी साफ-सुथरी छवि और विधानसभा में विकास के विजन को लेकर जनता के बीच हैं। ऐसे में अब देखना काफी दिलचस्प होगा कि इस बार चुनावी ईंट किस करवट बैठेगा।इसी क्रम में माधवेंद्र राय गंगा उस पार ज़बरदस्त जनसंपर्क अभियान में लगे हुए है। आज श्री मानवेंद्र राय ने पटकनिया, गाउरा,नवली,रेवतीपुर, उतरौली,त्रिलोकपुर आदि गाँवों में महा जनसंपर्क अभियान किया जहाँ उन्होंने ने भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे जनता विरोधी कार्योँ की जमकर आलोचना की तथा जनता से वादा किया कि उनकी सरकार बनने पर सबका हिसाब लिया जाएगा। इस मौके पर, गुलाब राम, पीयूष राय, चंद्रिका यादव, नारद राम, राजेश यादव, पीचुन यादव, पारस नाथ, मुन्ना, मुलायम यादव, बबलू यादव, सतीश राय, हरिशंकर सिंह, रघुराज सिंह, प्रताप सिंह, सूरज सिंह,टोनु राय, सोनू राय आदी मौजूद रहे।

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