More
    HomeUncategorizedप्राचीन काल से पवित्र है कलावा, हर धागे में रक्षा का संकल्प

    प्राचीन काल से पवित्र है कलावा, हर धागे में रक्षा का संकल्प

    अवनीश कुमार दूबे:- कछवांरोड

    कछवांरोड /- आधुनिकता ने भले ही राखियों की तमाम वैरायटी बाजार में उतार दीं हों, मगर आज भी कलावा श्रेष्ठ है। इसी कलावा को पहनकर लोग राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया करते थे। शेखर चौबे ने कहा कि हमें अपनी प्राचीन परंपरा नहीं भूलनी चाहिए। रक्षाबंधन पर्व पर बहनें अपने भाई की कलाई में कलावा बांध सकती हैं। यह सबसे श्रेष्ठ है। हर धागे में रक्षा का संकल्प है। इससे कोरोना से तो बचाव होगा कि बाजार में चीन की राखियों को खरीदने से भी बच सकेंगे।

    सभी संकल्प लें कि चीन की राखी कतई नहीं खरीदेंगे। ठठरा गांव के शेखर चौबे ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी तमाम कथाएं हैं। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को पड़ता है। आमतौर पर तो बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, मगर प्राचीन समय से ब्राह्मण और गुरु भी रक्षासूत्र (कलावा) बांधते आ रहे हैं। भविष्य पुराणा में वर्णन मिलता है कि एक बार देव और दानव में युद्ध हुआ। दानव की शक्ति बढऩे पर भगवान इंद्र घबराकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। यहां इंद्राणी ने इंद्र के भाव को भांप लिया।लिया।

    उन्होंने रेशम के धागे को मंत्रों से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बांध दिया। यह श्रावण पूर्णिमा का दिन था और युद्ध में इंद्र की विजय हुई। राजमन तिवारी ने कहा कि स्कंद पुराण में भगवान वामन और राजा बलि की कथा है। राजा बलि ने जब भगवान वामन को सबकुछ दान कर दिया तो पाताल लोक में रहने लगा। उसने अपनी तपस्या से यह वरदान मांग लिया कि वामन भगवान उनके पास ही रहेंगे। काफी समय तक जब वामन भगवान नहीं लौटे तो लक्ष्मीजी परेशान हो गईं। तब नारदजी के कहने पर लक्ष्मीजी पाताल लोक पहुंच गईं।

    उन्होंने राजा बलि की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बना लिया। उसके बाद अपने पति विष्णु (वामन भगवान) को साथ ले गईं। साध्वी पुनीता ने बताया कि तब रक्षासूत्र यही कलावा हुआ करते थे। कलाई और भुजाओं में यह बांधा जाता था। भागवत कथा, सत्यनारायण की कथा में भी कलावा ही कलाई में बांधा जाता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर इससे पवित्र चीज और कोई नहीं हो सकती है। इसलिए 22 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व पर भाइयों की कलाई पर कलावा ही बांधे। इससे कोरोना वायरस के संकट से बचेंगे साथ ही चाइना की राखी खरीदने से बचाव होगा।

    RELATED ARTICLES

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    - Advertisment -

    Most Popular

    Recent Comments