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    प्रचार की भूखी डबल इंजन सरकारें जनता के माथे पर ही ‘मोदी जी की कृपा से’ लिख देना चाहती है: ललितेश पति त्रिपाठी

    मिर्जापुर, 07 अगस्त 2021: 5 अगस्त, गुरुवार को ‘मुफ्त’ भाषण और झोला वितरण का कार्यक्रम पूरे प्रदेश में चलाया गया। ऐसा ही कार्यक्रम आज यानी 7 अगस्त, शनिवार को मध्य प्रदेश में चलाया गया है। मैं इसे राशन वितरण कार्यक्रम इसलिये नहीं कह रहा हूँ क्योंकि मुफ्त राशन वितरण का कार्यक्रम पहले से ही चल रहा है। इस देश में मुफ्त टीका, सस्ता राशन, कर्जमाफी जैसे कल्याणकारी कार्यक्रम पहले भी चलते रहे हैं लेकिन कभी किसी सरकार ने इसके लिए जनता को कृपापात्र महसूस कराने की कोशिश नहीं की। ऐसा लगता है कि प्रचार की भूखी डबल इंजन सरकारें अब जनता के माथे पर ही ‘मोदी जी की कृपा से’ लिख देना चाहती है।

    जब से इस देश में मोदी जी की सरकार आई है जनता को कृपापात्र दर्शाने की अजीब सी परिपाटी चल पड़ी है। आपको हर चट्टी-चौराहों, पेट्रोल पंप, सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त राशन, मुफ्त वैक्सीन लिखा हुआ बैनर मोदी जी की मुस्कुराती हुई तस्वीर के साथ झूलता हुआ दिख जाएगा। जो इस देश के गरीबों को हर वक्त यह याद दिलाने के लिए लगाया गया है कि अगर आपके घर में चूल्हा जल रहा है तो मोदी जी की कृपा से, आप जीवित हैं तो मोदी जी की कृपा से! जब सरकार को यह भी नाकाफी लगने लगा तो राशन की दुकानों पर 20 किलो के झोले में पांच किलो राशन के साथ मोदी जी का भाषण परोसा गया।

    मैं प्रेस के माध्यम से इस सरकार से पूछना चाहता हूँ कि सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक यूपीए सरकार में 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया, लेकिन इस सरकार में अगर 23 करोड़ लोग फिर से गरीबी रेखा से नीचे चले गए तो क्या यह मोदी जी की कृपा नहीं है? देश के 98 फीसद लोगों की आय कम हुई तो क्या यह मोदी जी की कृपा नहीं है? मोदी जी ने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन दो करोड़ लोगों का रोजगार छिन गया तो क्या ये मोदी जी की कृपा नहीं है? कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन, अस्पताल में बेड, दवाओं की कमी से हजारों लोग तड़प कर मर गए तो क्या ये मोदी जी की कृपा नहीं है? क्या मोदी जी और योगी जी इन लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र पर भी अपनी तस्वीर लगाना चाहेंगे?

    आपको याद होगा किस तरह योगी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी के लिए हर ज़िला मुख्यालयों पर करोड़ों रुपए खर्च कर किसानों को अपनी तस्वीर के साथ कर्जमाफी का प्रमाणपत्र बांटा। कर्जमाफी कांग्रेस की यूपीए सरकार में भी हुई जो बस कैबिनेट में घोषित हुई और बैंक खातों में माफ़ हुई। कभी किसानों को बुलाकर उन्हें लाचार साबित करने की कोशिश नहीं की गई। पोलियो का टीका घर घर जा कर लगाया गया, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टी.बी., डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, खसरा के टीके लगाने का अभियान चलाया गया लेकिन तब के प्रधानमंत्रियों ने अपनी तस्वीरों के साथ प्रमाणपत्र नहीं बांटे। थैंक यू मोदी जी जैसा फूहड़ प्रचार नहीं किया।

    लिहाज़ा इस सरकार को यह याद दिलाना जरूरी है कि जिस आनाज का वो वितरण कर रही है वो इन्हीं किसानों और मजदूरों ने पैदा किया है, बस झोला आपका है और वो भी जनता के पैसे से खरीदा गया है। जिस वैक्सीन को आप मुफ्त में बांटने का दावा कर रहे हैं वो भी इस देश के लाखों करोडो़ करदाताओं के खून पसीने की कमाई पर उगाहे गए टैक्स से दी जा रही है, मुफ्त कुछ भी नहीं है। यह इस देश की जनता का हक है जिनका सेवक होने का आप दावा करते हैं।

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