प्रक्षेत्र प्रबंधक द्वारा नैनो तरल डीएपी का धान की फसल पर हुआ प्रदर्शन

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रतनपुरा,मऊ । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी मऊ पर आज इफको के प्रक्षेत्र प्रबंधक द्वारा नैनो तरल डीएपी का प्रदर्शन धान की फसल पर कराया गया । केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. एल. सी. वर्मा ने बताया कि धान मे रोपाई के समय ही नैनो तरल डीएपी का प्रयोग करना अधिक लाभप्रद होता है। इस प्रयोग के लिए एक टब में 10 लीटर पानी लेकर उसमें करीब 25 मिलीलीटर नैनो तरल डीएपी मिलाकर 15 से 20 मिनट तक छोड़ देते हैं इस दौरान इस घोल को घड़ी के दिशा मे एवं विपरीत दिशा में घुमाते हैं जिससे यह पूर्ण रूप से पानी में मिल जाए तत्पश्चात धान की नर्सरी के बंडल को टप में डाल दिया जाता है।

इस विधि से धान की नर्सरी नैनो तरल डीएपी में मौजूद पोषक तत्वों को अपने अंदर अवशोषित कर लेती है यह प्रक्रिया बहुत ही लाभदायक होती है। 1 एकड़ प्रक्षेत्र में 500 मिलीलीटर तरल डीएपी की आवश्यकता पड़ती है। रोपाई के लगभग 25 दिन बाद तरल नैनो डीएपी का पर्णीय छिड़काव किया जाता है इस प्रकार से डीएपी की संपूर्ण खुराक फसल को प्राप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया से डीएपी में मौजूद सभी पोषक तत्व फसल को 95 से 100% तक प्राप्त हो जाते हैं। प्रक्षेत्र प्रबंधक डा. एल. पी. सिंह ने बताया कि दानेदार डीएपी का छिड़काव खेत में करने से मात्र 30 प्रतिशत ही मौजूद पोषक तत्वों का उपयोग होता है एवं 70 प्रतिशत पोषक तत्व पौधों को प्राप्त नहीं होते हैं। सस्य वैज्ञानिक डा. अंगद प्रसाद ने कहा कि नैनो तरल डीएपी दानेदार खाद की अपेक्षा काफी कम मात्रा मे प्रयोग होती है जिससे किसानों की आमदनी दुगनी करने में काफी मददगार सिद्ध होगी। डा. वी.के. सिंह ने धान की फसल पर होने वाले जैविक खाद के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
नैनो तरल डीएपी के परीक्षण के समय इंजीनियर एस.एन. चौहान ने कहा कि लाइन से लाइन रोपाई करने पर खरपतवार के नियंत्रण में काफी सहायता मिलती है एवं पौधों को उचित विकास के लिए पर्याप्त जगह भी मिल जाती है। लाइन से रोपाई करने पर फसल की पैदावार भी बढ़ जाती है और लागत भी कम आती है। रोपाई के समय पूर्ण तकनीकी सहयोग रितंजय कुमार सिंह, शैलेश कुमार सिंह द्वारा किया गया।

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