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    Homeउत्तर प्रदेशपूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा दोबारा भी पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे

    पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा दोबारा भी पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे

    लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में हुए 1400 करोड़ रुपये से अधिक के स्मारक घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के अधिकारियों का सामना करने से बच रहे हैं। पूर्व मंत्री ने दोबारा अपनी बीमारी का हवाला देकर पूछताछ से किनारा कर लिया। विजिलेंस ने उन्हें नोटिस देकर मंगलवार को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। पूर्व मंत्री ने विजिलेंस को अपनी मेडिकल रिपोर्ट भेजी है और स्वास्थ्य कारणों से बाद में बयान दर्ज कराने की बात कही है। इससे पूर्व कुशवाहा को नोटिस देकर जुलाई माह में तलब किया गया था। तब भी उन्होंने स्वास्थ्य ठीक न होने की बात कहकर 15 दिनों की मोहलत मांग ली थी। उन्हें फिर नोटिस दिए जाने की तैयारी की जा रही है।

    स्मारक घोटाले की जांच कर रहे विजिलेंस ने पिछले माह नामजद आरोपित पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी व बाबू सिंह कुशवाहा को तलब किया था। विजिलेंस अधिकारियों ने पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी से लंबी पूछताछ की थी और उनके बयान दर्ज किए थे। विजिलेंस नसीमुद्दीन के बयानों का परीक्षण कर रहा है, क्योंकि अधिकतर सवालों पर तकनीकी कमेटियों, कार्यदायी संस्थाओं व तत्कालीन अधिकारियों पर जिम्मेदारी टाल दी थी। विजिलेंस उन्हें दोबारा भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। हालांकि उससे पहले कुछ तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। स्मारक घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है।

    उल्लेखनीय है कि बसपा शासनकाल में लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में बने स्मारक व पार्कों में भारी आर्थिक अनियमितता की शिकायतें हैं। विजिलेंस ने जनवरी, 2014 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दोनों पूर्व मंत्रियों समेत 199 आरोपितों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई थी। करीब सात वर्षों से चल रही विजिलेंस जांच ने पिछले कुछ माह में रफ्तार पकड़ी है। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने बसपा का साथ छोड़ने के बाद अपनी जनअधिकारी पार्टी का गठन कर लिया था।

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