पुत्र की की दीर्घायु के लिए माताओं ने निर्जला व्रत रहकर किया जिउतिया पूजा

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(गाजे-बाजे के साथ मंदिरों के पास तालाबों पर पूजा करने पहुँची महिलाएं)

अभिषेक त्रिपाठी/वाराणसी

वाराणसी। पुत्र की सलामती और लंबी उम्र के लिए बुधवार को जिउतिया पूजा का पर्व मनाया गया। महिलाओं ने अन्न-जल ग्रहण किए बिना व्रत रखा। दोपहर बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर और हाथों में पूजा की थाल लेकर व्रती महिलाएं ने गाजे-बाजे के साथ मंदिरों, गंगा घाटों और सरोवरों के किनारे पहुँची।यहाँ बनाए गए गोंठों में महिलाओं ने जिउतिया माता की पूजा कर सुख-सौभाग्य की कामना की। जगह-जगह भीड़ होने से मेले जैसा नजारा रहा। पुत्र की प्राप्ति एवं उनके दीर्घायु के लिए जीवित्पुत्रिका का कठिन व्रत महिलाएं रहती हैं। निर्जला व्रत रख कर महिलाएं सुबह से ही पूजन की तैयारियों में लगी रहीं। तरह-तरह के पकवान बनाने के बाद दोपहर में पूजन सामग्री के साथ महिलाएं गंगा के किनारे, सरोवरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की ओर रवाना हुईं। गाजे-बाजे के साथ पहुँची महिलाओं ने विधि विधान से जिउतिया माता का पूजा की। इस दौरान माता के महात्म्य से जुड़ी कहानियां भी सुनाई गईं। महिलाओं ने प्रतीक के रूप में सोने या चांदी की जिउतिया को गले में धारण किया। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पुत्र पर आने वाले संकट टल जाते हैं। मिर्जामुराद, खजुरी, रखौना, भिखारीपुर, मेहदीगंज, बेनीपुर, लालपुर, राने चट्टी, चक्रपानपुर, खालिसपुर, पूरे, आषाढ़, रूपापुर, कछवांरोड, ठठरा, मानापुर छतेरी, चित्रसेनपुर,आदि इलाकों में महिलाओं ने आस्था के साथ जिउतिया माता का पूजन किया। मिर्जामुराद स्थित हनुमान मंदिर के पास तालाब पर बंगला चट्टी स्थित शिव मंदिर के तालाब पर कछवांरोड चित्रसेनपुर बंम भोले मंदिर पर जीवित्पुत्रिका की पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पकवानों संग नारियल, केला, सेब, सतंरा, नाशपाती, आमला, अमरुद के साथ पूजन अर्चन किया। ढोल तासे के साथ तालाब और सरोवर के किनारे सामूहिक पूजन अर्चन कर जीवित्पुत्रिका माता की कथा सुनी और उसके बाद व्रत का पारण किया। पूजा स्थलों पर आयोजित मेेले का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। बच्चों ने खिलौनों आदि की खरीदारी की। जिउतिया माता के पूजन के लिए व्रती महिलाओं की भीड़ उमड़ी। शाम को चार बजे महिलाएं यहां पहुँचने लगीं। करीब घंटे भर बाद मेले जैसा नजारा हो गया। महिलाओं ने विधि-विधान से मां की पूजा की और मांगलिक गीत गाए। मिर्जामुराद बाजार व कछवांरोड चौराहे पर फल और फूलों की दुकानें भी सज गई थीं, जहां लोगों ने एक दिन पहले से ही खरीदारी भी करना चालू कर दिए थे।

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