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    Homeजनपदनागेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालु कर रहे हैं भागवत कथा का रसपान

    नागेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालु कर रहे हैं भागवत कथा का रसपान

    गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील के ऊँचाडीह स्थित नागेश्वरनाथ मन्दिर परिसर में गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी द्वारा भागवत कथा की जा रही है।इस भागवत कथा में भारी संख्या में भीड़ उमड़ रही है
    श्रोताओं को ज्ञान एवम वैराग्य की कथामृत का रसपान कराते हुए स्वामी जी ने कहा परीक्षित को पांडवो ने राज्य सिंहासन पर बैठा कर स्वर्गारोहड़ किया, तथा उन्हें उपदेश दिया कि अगर कोई ब्यक्ति कितना भी बड़ा अपराधी ही क्यों न हो ,अगर एक बार शरण में आ जाता है तो उसको एक बार जीवन दान देना ,और कभी भी संतो का अपमान मत करना। जब राजा परिक्षित कुरांजल प्रदेश जा रहे थे तभी उन्होंने कलयुग को देखा कि एक बैल के तीन पैर कट चुका है ,एक पैर है उस पैर को भी एक राजा काट रहा था।यह देख राजा परिक्षित उसे मारने के लिए तैयार हो गए।ज्यों ही मारने चले वह राजा उनकी शरण में गिर गया। तब राजा परीक्षित ने उसके माँगने पर चार स्थान कलयुग को दिया, जहा जुआ खेला जाए, जहां दारू पिया जाए, जहा बेश्या बृति हो, जहा जीवों की हत्या हो ,एक और याचना किया तो स्वर्ण में स्थान दिया, इसीलिए सोना अधिक नही पहनना चाहिए।सोने के मुकुट में कलयुग प्रवेश कर गया ,एक दिन परिक्षित मृगयार्थ हिरणों का शिकार खेलने गए ,और उन्हें बड़ी तेज प्यास लगी तभी शमिक ऋषि की कुटिया दिखाई दी , वहा शमिक जी तपस्या में लीन ध्यान में बैठे थे ।उस समय राजा परिक्षित के सोने के मुकुट में कलयुग का प्रवेश हो गया था। तब कलयुग के प्रभाव में राजा परीक्षित ने संत के साथ अपराध कर दिया, गले में मरा सर्प डाल कर जाने लगे तभी शमिक के पुत्र ने उन्हें श्राप दे दिया कि आज के सातवे दिन तुम्हारी सर्प के डसने से मृत्यु होगी ,ज्योहि परिक्षित ने महल जाकर सोने का मुकुट उतार कर रखा बुद्धि सात्विक हो गई, शमिक के शिष्यों ने बताया आपको श्राप लग चुका है, उसी समय परिक्षित ने अपने पुत्र जनमेजय को राज्य तिलक कराकर गंगा का आश्रय लिया ।

    इस अवसर कृष्णानंद राय,अरुण राय,विजय बहादुर राय, सुमंत पांडे, रमेश राय,मिश्रा जी,अजय राय,दिनेश राय, छोटेलाल राय , सहित क्षेत्र के गांवों व उचाडीह के समस्त ग्राम वासी/श्रद्धालू भारी संख्या उपस्थित रहे ।

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