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    दीपक तले अंधेरा- 500 मीटर दूरी तय करने में फायर ब्रिगेड को लगा एक घंटा

    कुशीनगर जिला मुख्यालय का हाल

    कुशीनगर। जिला मुख्यालय रविन्द्रनगर में दीपक तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ हो गई जब मुख्यालय पर लगी आग को बुझाने में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को करीब एक घंटे का वक्त लगा। नतीजा हुआ कि जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचती, करीब आधा दर्जन दुकानें जलकर स्वाहा हो गईं। सवाल उठता है कि आखिर जब फायर ब्रिगेड अपने आसपास ही घटनाओं को रोकने में सक्षम नहीं है तो दूर दराज के इलाकों में किस तरह से वो पहुंचते होंगे ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं।

    दरअसल कुशीनगर जिला मुख्लायल मुख्य हाइवे पर हाईवोल्टेज लाइन गई हुई है। और नीचे आबादी और दुकानें हैं। जिसकी शिकायत कई बार स्थानीय लोग कर चुके हैं लेकिन सम्बंधित विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जिसका नतीजा तब सामने आया जब जर्जर हाईवोल्टेज तार में शार्ट सर्किट हुआ और कई दुकानों को उसने अपनी चपेट में ले लिया। जिसके बाद करीब आधा दर्जन दुकानें धू-धू करके जलने लगीं। आनन फानन में दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड और 112 नंबर पर कॉल किया, कुछ दुकानदार भागते हुए बगल में मौजूद एसपी ऑफिस भी पहुंचे लेकिन तब तक ना तो फायर ब्रिगेड पहुंचा ना ही बिजली विभाग के कर्मचारी। नतीजतन जब पूरी दुकानें जल गईं तो धुएं पर पानी मारने फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंची, तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इस मामले को लेकर स्थानीय नगरवासियों में खासा आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब फायर ब्रिगेड मुख्यालय के नागरिकों और उनके जानमाल की सुरक्षा नहीं कर सकता तो फिर पूरे जनपद की सुरक्षा कैसे करेगा।

    जिला मुख्यालय पर खतरनाक तारों की भरमार

    आपको बता दें कि जिला मुख्यालय पर खतरनाक तारों की पूरी भरमार है। जनपद के नवोदय विद्यालय को सप्लाई होने वाली 11 हजार बोल्ट की सप्लाई वाली तार महीनों से नीचे झूल रही है लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। शायद उन्हें भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है जैसा कि बुधवार देर रात मुख्यालय के सरस्वती चौक पर हुआ।

    स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश

    आग लगने से हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों और दुकानदारों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। खासकर फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली से, लोगों का गुस्सा पुलिस पर भी है क्योंकि पुलिस तब वहां पहुंची जब सड़क पर जाम जैसी स्थिति हो गई।

    हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और

    वास्तव में जिला मुख्यालय की अव्यवस्था हाथी के दांत की तरह है। जरा सी बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं। कभी हाईवोल्टेज तो कभी लो वोल्टेज की समस्या से यहां के नागरिक दिनरात जूझते हैं। बारिश में लगातार बिजली ना आना आम बात है। जबकि कहने को यहां के रहवासी नगरपालिका क्षेत्र पडरौना के सबसे वीआईपी इलाके में आते हैं। सवाल उठता है कि जब जिला प्रशासन अपने आसपास के लोगों को ही सुविधा और सुरक्षित जीवन नहीं दे पा रहा है तो फिर पूरे जिले का क्या हाल होगा, समझना ज्यादा मुश्किल नहीं।

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