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    तालिबान के विरोध में हेमंत पीस आर्मी द्वारा अस्सी घाट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन

    -काशीवासी रक्षाबंधन के दिन अफगानी महिलाओं के “शिक्षा, काम और आवाजाही की स्वतंत्रता के अधिकारों” की उठाई माँग,

    वाराणसी। अभिषेक त्रिपाठी

    वाराणसी। हथियार और हिंसा से हम कभी भी प्रजात्रंत्र अथवा लोकतंत्र की स्थापना नहीं कर सकते और नहीं मानवाधिकारो की रक्षा कर सकते है। वर्तमान में जो घटनाये तालिबान में हो रहा है वो सापेक्ष रूप से विश्व के पटल पर काला धब्बा है। अमेरिका और ब्रिटेन ने जिस प्रकार शांति स्थापना के नाम पर अफ़ग़ानिस्तान में वर्षो राज किया वो उनकी शांति स्थापना का पार्ट नहीं था। अगर शांति स्थापना का कार्य होता तो क्या एक दिन में या पांच दिन में तालिबान इतनी मजबूती के साथ नहीं उतरता। आज जिन हथियारों के बदौलत तालिबान सम्पूर्ण अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के लिए बढ़ रहा है वो साधारण हथियार नहीं है। तालिबान पूर्ण रूप से अत्याधुनिक और नाईट विजन वाले हथियरों से लैस है जो अफ़ग़ानिस्तान की मानवता को खत्म करने के लिए पर्याप्त है। मानव विकास और समानता इन हथियारों के बदौलत स्थापित नहीं कि जा सकती । हथियारों की जरुरत मात्र सीमाओं की रक्षा करने के लिए किया जा सकता है। यह वाक्य हेमंत पीस आर्मी के संस्थापक डॉ हेमन्त यादव ने रविवार दोपहर बाद अस्सी घाट पर तालिबान के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में कहाँ। डॉ हेमंत ने उपस्थित जनमानस को सम्बोधित करते हुए कहा भारत ने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश को अलग किया। यहाँ पर भारत ने किसी भी नागरिक पर हथियार नहीं उठाया लेकिन आज जिस प्रकार तालिबान ने हथियारों के बदौलत अफ़ग़ानिस्तान पर शासन करना चाह रहा है यह पूर्ण रूप से गलत है। पूरे विश्व समाज को इसका सयुक्त विरोध करना चाहिए। वर्तमान में चाहे तिब्बत का मुद्दा हो या अफ़ग़ानिस्तान का भारत जैसे देश को कभी भी चुप नहीं बैठना चाहिए। 1959 को चीन ने आर्मी के बादौलत तिब्बत पर अधिकार कर लिया और भारत ने उसको मान्यता दे दिया जिसका परिणाम वर्तमान में हमें भुगतना पड़ रहा है। चीन ‘रूफ ऑफ द वर्ल्ड’ पर बैठ कर हमें आंखे दिखा रहा है। आज तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश कर गया है जो कल हमें भी आँखे दिख सकता हैं। तालिबान की अर्थ व्यवस्था पूर्ण रूप से अफीम के व्यापार पर आधारित है। अफ़ग़ानिस्तान पुरे विश्व में अफीम उत्पादन में नंबर एक है। पूरा अफीम व्यापार का बड़ा हिस्सा इन्ही हथियारों की खरीद फरोख्त में किया जाता है। अगर हम आज तालिबान को मान्यता प्रदान कर देते है तो मानवता का अस्तित्व मिटते देर नहीं लगेगी। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2015 में अपने भाषण में कहा था कि “गुड तालिबान हो या बैड तालिबान, तालिबान मतलब तालिबान” है। सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि अफगान महिलाओं और लड़कियों के साथ ही सभी अफगान नागरिकों को सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने के हकदार हैं। “किसी भी प्रकार के भेदभाव और दुर्व्यवहार पर रोक लगनी चाहिए। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए थे जिस पर लिखा था “We Need Peace in the World”, “We Want “Vasudhaiva Kutumbakam” in the World”, If You Want to Win Afghanistan, First Win the Hearts of Afghans, “If you want to rule, first established fair democracy”, Make Peace Not War ‘ प्रदर्शन में सर्वश्री राजकुमार गुप्ता, धीरज कुमार, उमेश यादव, संदीप, अंकित, विशाल, आयुष, गौतम, हर्षित, विवेक सहित दर्जनों युवा उपस्थित थे। प्रदर्शन का आयोजन हेमंत पीस आर्मी के तत्वाधान में किया गया जिसका एक मात्र उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में भाईचारा एवं लिंग भेद, जाति भेद, नस्ल भेद रहित समानता वाले समाज की स्थापना करना है।

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