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    टीकाकरण के लिए परिवारों को राजी करेंगे धर्मगुरु




    टीकाकरण के लिए परिवारों को राजी करेंगे धर्मगुरु

    -16 ब्लाकों में टीकाकरण से मना करने चिन्हित किये गए 335 परिवार

     

    -जागरूकता के लिए नामित गए गए 15 धर्म गुरु

     

    देवरिया। जिले में शासन के दिशा-निर्देश पर चलाए जा रहे नियमित टीकाकरण अभियान मिशन इंद्रधनुष 4.0 की सफलता के लिए धर्मगुरुओं की मदद ली जाएगी। 16 ब्लाक में नियमित टीकाकरण से मना करने वाले परिवारों को टीकाकरण के लिए जागरूक करने के लिए 15 धर्म गुरुओं को नामित किया गया है, जो टीकाकरण के लिए परिवारों को राजी करेंगे।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. आलोक पांडेय ने बताया कि टीकाकरण अभियान के प्रति जागरूकता लाने के लिए यूनिसेफ और धर्मगुरुओं की भी मदद ली जा रही है। बच्चों को टीका लगवाने के लिए धर्म विशेष के बाहुल्य इलाकों के लोगों में रुचि न होने के कारण तमाम बच्चे दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं। जिले के 16 ब्लॉक में 335 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने बच्चों को नियमित टीकाकरण से मना कर दिया है। ऐसे परिवारों को यूनिसेफ के सहयोग से एएनएम और आशा कर्यकर्ता के माध्यम से चिन्हित किया गया है। हर ब्लाक में दो धर्म गुरुओं को नामित किया गया है। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मुस्लिम धर्म गुरु और हिन्दू बाहुल्य इलाकों में हिन्दू धर्म गुरुओं की मदद से टीकाकरण से इनकार करने वाले परिवारों के बच्चों का टीकाकरण कराया जायेगा। ऐसे परिवारों को बताया जाएगा कि सरकारी अस्पताल का टीका सुरक्षित, असरदार और निःशुल्क होता है।

     

    सीएमओ ने बताया कि तरकुलवा ब्लाक में बाबा बालक दास, जलालुदीन अंसारी, बैतालपुर ब्लाक में शिव प्रसाद और रामछबीला,  गौरी बाजार ब्लाक में महफूज आलम और मुहम्मद वाली आजमी, सलेमपुर ब्लाक में मौलाना मुहम्मद नावेद, रहमतुल्लाहि, देसई देवरिया ब्लाक में सत्य प्रकाश ओझा, शाह मनुवर, भटनी ब्लाक में जाहिद अली, अभिषेक मिश्रा, रामपुर कारखाना ब्लाक में मौलवी नररूद्दीन और अर्बन ब्लाक में मुहम्मद गुलाम शबिर और अब्दुल रहमान को नामित किया गया है। यह लोग यूनिसेफ के सहयोग से टीकाकरण से मना करने वाले परिवारों को जागरूक कर समझा- बुझाकर टीकाकरण कराएंगे। इसके साथ ही धर्म गुरु अपने संस्थानों से लाउडस्पीकर के जरिये व अपील छपवाकर, या सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में स्वास्थ विभाग का सहयोग करेंगे।

     

     

    पांच साल में सात  बार लगता है टीका

     

    यूनिसेफ के डीएमसी गुलजार त्यागी ने बताया कि जीरो से दो वर्ष और महिलाओं को जो टीके लगाए जाते हैं, वे 12 बीमारियों से बचाते हैं। इसके लिए 10 टीके लगाए जाते हैं। पांच साल में सात  बार टीकाकरण होता है। छूटे हुए बच्चे की पहचान करना बेहद आसान है। उसे सिर्फ इतना पूछा जाना चाहिए कि उसने टीकाकरण कितनी बार कराया है। इससे यह पता चल जाएगा कि वह छूटे हुए लाभार्थी में आता है या नहीं। साथ ही सर्वे व अन्य माध्यमों से भी ऐसे लोगों की पहचान लगातार की जा रही है, जिसमें धर्म गुरुओं की भी मदद ली जाएगी ।

     

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