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    चाँदी की राखी गुल्लक के पैसों से खरीद कर आयुषी ने पेश की पर्व की मिसाल

    ब्यूरो चीफ बहराइच मनमोहन तिवारी

    बिशेश्वरगंज
    रक्षाबंधन से संबंधित अनेक कथाएं हैं। रक्षा बंधन के दिन सुबह भाई-बहन स्नान करके भगवान की पूजा करते हैं। इसके बाद रोली, अक्षत, कुमकुम एवं दीप जलाकर थाल सजाते हैं। इस थाल में रंग-बिरंगी राखियों को रखकर उसकी पूजा पश्चात बहनें भाइयों के माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करती हैं। इस पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जनपद के विकासक्षेत्र बिशेश्वरगंज अंतर्गत रक्षाबंधन पर्व की धूम रही । राखी से मिठाई तक सजी दुकानों पर पर्व की रौनक दिखी और अच्छी मिठाई व महँगी राखियां खरीदने वालों की भरमार दिखी । वही बिशेश्वरगंज की कुरसहा निवासी
    अमित पाठक की आठ वर्ष की पुत्री आयुषी ने पर्व पर मिशाल कायम करते हुए गुल्लक में वर्षों से किये गए इकट्ठे पैसों से भाई भारत पाठक के लिए चाँदी की राखी व प्राचीन धागा खरीदा । जिसे विधि विधान पूर्वक कलाई में बाँधकर प्रेम और अपनत्व के प्रतीक त्यौहार की गरिमा बढ़ाई । आयुषी ने पंचक दशा से पूर्व प्रातः 7 बजकर 4 मिनट पर राखी बांधी । ग्रंथों की माने तो अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है, आयुषी का कहना है कि भाई बहन का लड़ना झगड़ना ही प्यार है , हम जितना लड़ेंगे उतने करीब रहेंगे ।

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