गुलाब के बाद मंडरा रहा है एक और चक्रवात “जवाद” का खतरा इंडियन मेट्रोलोजिकल डिपार्टमेंट ने दी चेतावनी, किसान रहे सतर्क

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मुहम्मदाबाद, गाजीपुर। बिगत दो महीनों में 3-3 चक्रवाती तूफान का का आना प्रकृति का मानव जाति को एक संदेश है कि अगर हम अब भी नहीं सुधरे तो संपूर्ण विनाश ज्यादा दूर नहीं है। मानव जाति अपने ही बनाए जाल में फंसती जा रही है, प्रकृति की ऐसी कोई चीज नहीं बची है जिसका उसने व्यापार नहीं किया है चाहे वो हवा हो या पानी। उसकी की यही लालच ने संपूर्ण मानव जाति को काल के मुह में डाल दिया। आज जो भी घटनाये हो रही है वो इसका ही नतीजा है फिर चाहे वो चक्रवात हो, सूखा हो,भूकंप हो, भूस्खलन हो, या महामारी हो प्रकृति ने अब अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है। महात्मा गांधी का कथन है कि पृथ्वी हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्रकार के साधन प्रदान करती है, लेकिन लालच को पूरा करने के लिए नहीं। द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत समूचा वैश्विक जगत आर्थिक विकास की होड़ में इस कदर शामिल हुआ कि प्रकृति और जीव संबंध को धीरे-धीरे दरकिनार बैठा।

मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया होता तो ठीक था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मनुष्य ने प्रकृति को अपना गुलाम बनाना चाहा, लाभ के लिए जंगल काटे, जंगलों में आग लगाई, खनन किया, पानी का दोहन भी किया गया, प्रदूषण फैलाया। प्रकृति के कार्यों में मनुष्य ने व्यवधान पैदा करना शुरू किया। ऐसा करते हुए मनुष्य को भरोसा हो गया था कि उसने प्रकृति को पूरी तरह पराजित कर दिया है। लेकिन वह शायद भूल कर बैठा कि प्रकृति शाश्वत है। परिणामस्वरूप प्रकृति द्वारा प्रहार तो होना ही था।फलस्वरूप की मार क्या होती ये अब दिख रहा, तबाही का ऐसा मंजर की इंसान अपनी बेबसी के सिवा कुछ नहीं कर सकता। अभी सप्ताह दिन भी नहीं बीते जिसमें गुलाब चक्रवात ने गाजीपुर समेत पूरे प्रदेश में तबाही का वो मंजर दिखाया कि सभी की रूह कांप गयी। कई किसान तो भुखमरी की दहलीज पर आ चुके है क्योंकि इस चक्रवाती बारिश ने उनकी सारी फसल बर्बाद कर दी है। भावरकोंल ब्लॉक के सुखडेहरा गाँव के पूर्व प्रधान दुर्गा राय ने कहा कि ऐसी चक्रवाती बारिश उन्होंने ने अपने जीवन काल में नहीं देखी थी। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित होने वाले तूफान की प्रक्रिया शनिवार को शुरू हुई, जिससे उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर एक ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण का निर्माण हुआ। आईएमडी के नवीनतम मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तरी अंडमान सागर और इसके आस-पास के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से अगले 36 घंटों के दौरान उसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद के 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ने की संभावना है।
इंडियन मेट्रोलोजिकल डिपार्टमेंट लखनऊ सेंटर ने गाजीपुर समेत पूरे प्रदेश में जारी किया चेतावनी, 16 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के बीच तेज हवाओं और गरज/चमक के साथ से तेज बारिश की है संभावना।मौसम विभाग के इस चेतावनी से करईल के दर्जनो गाँव के किसानों में डर का माहौल है। वो ईश्वर से यही कामना कर रहे हैं कि इन्द्रदेव इसबार हम पर कृपा दृष्टि बनाए रखना।

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