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    केंद्र का विपक्ष पर पलटवार, UPA ने हर 4 मिनट में 1 विधेयक पारित किया था

    केंद्र सरकार ने दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाले विपक्षी दलों को आंड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि अराजकता हमेशा उनका एजेंडा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान हुआ कामकाज को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, प्रह्लाद जोशी और अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि तमाम व्यवधानों के बावजूद राज्यसभा में इस सत्र के दौरान हर दिन पारित होने वाले बिलों की संख्या 2014 के बाद दूसरी बार सबसे अधिक थी। 

    मंत्रियों ने कहा कि 11 अगस्त तक व्यवधान और स्थगन के कारण 76 गंटे 26 मिनट का नुकसान हुआ। रोजाना के हिसाब से यह औसतन 4 घंटे 30 मिनट था। उन्होंने कहा कि व्यवधानों के बाद भी दोनों सदनों में 22 विधेयक पारित किए गए। जिसमें कई अहम बिल भी शांमिल थे। मंत्रियों ने कहा कि यह संसद में विधायी एजेंडा चलाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता, प्रोडक्टिविटी और क्षमता को दर्शाता है, जिसका उदेश्य अपने नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना है।

    जल्दबाजी में पारित किए थे 18 विधेयक

    इन विधेयकों में से 19 को राज्यसभा में पारित किया गया, जिसमें ओबीसी आरक्षण पर महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक भी शामिल है। मंत्रियों ने आगे कहा कि ये सभी बिल राष्ट्रहित में हैं और इससे गरीबों, ओबीसी, श्रमिकों, उद्यमियों और समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर भी कटाक्ष किया, जो 2004 से 2014 तक सत्ता में थी, उन्होंने कहा कि तब जल्दबाजी में 18 बिल पारित किए। यह विपक्ष के इस आरोप के जवाब में था कि सरकार बिना किसी चर्चा के विधेयकों को पारित कर रही है। 

    72 मिनट में 17 विधेयक हुआ था पारित

    मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी एक विज्ञप्ति में सरकार ने उन बिलों को बताया है जो केंद्र में इस सरकार से पहले की सरकारों द्वारा पारित किया गया था। इन बिलों में  दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (संशोधन) विधेयक भी शामिल है, जिसे 2006 में केवल तीन मिनट में पारित किया गया था। केंद्र ने कहा कि औसतन, यूपीए सरकार ने 72 मिनट में 17 विधेयक पारित किए, या लगभग हर चार मिनट में एक विधेयक पारित किया।

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