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    कृषि वैज्ञानिक चले गाँव की ओर

    ड्रम सीडर विधि से करे धान की सीधी बुवाई – डॉ. नरेंद्र

    अभिषेक त्रिपाठी/मिर्जामुराद

    मिर्जामुराद। किसानों की समयाओं के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिको ने अब गाँव की ओर रूख किया है।कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को उनके खेत पर पहुँचकर खेती की नवीनतम तकनीकों की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।इसी क्रम मे आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, कल्लीपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ड़ा.नरेन्द्र रघुवंशी समेत डॉ.समीर पाण्डेय, डॉ.एन.के.सिंह डॉ.नरेंद्र प्रताप,कृषि विभाग के खण्ड तकनीकी प्रबंधक देवमणि त्रिपाठी ने मंगलवार को हरहुआ विकास खण्ड के ग्राम भटपुरवा कला में 50 एकड़ क्षेत्रफल में पैडी ड्रम सीडर विधि द्वारा बोये गये धान के प्रदर्शन का निरीक्षण किया।कृषि वैज्ञानियों ने धान की ड्रम सीडर विधि से बुआई के सम्बंध मे किसानो से चर्चा भी की।
    केवीके के अध्यक्ष डॉ. रघुवंशी ने ने बताया कि यदि कृषक ड्रम सीडर से धान की सीधी बुवाई करें तो समय के साथ रोपाई समेत मजदूरी एवं सिचाई पर आने वाले खर्च कमी आती हैं। समय से बुवाई होने पर फसल भी समय से तैयार हो जाती हैं। इसके बाद आलू या सरसों की बुवाई भी समय से कर सकते है।

    क्या है ड्रम सीडर

    डॉ.रघुवंशी ने ड्रम सीडर की संरचना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक बेलन पर 4 से 5 प्लास्टिक का ड्रम जो 60 सेंटीमीटर व्यास का होता है।जिसपर 8 से 9 सेंटीमीटर व्यास का छेद बना होता है।बेलन के दोनों किनारो पर प्लास्टिक के दो पहिये लगे होते हैन,ड्रम सीडर को चलाने के लिए बेलन से जुडा हैंडल होता है जिसे पकड़ कर आगे की ओर चलाया जाता है।रोपण विधि में एक एकड़ पर दो हजार से तीन हजार तक का व्यय आता हैं, जबकि इस विधि से 2 मजदूर द्वारा 4 से 5 घंटे में एक एकड़ की बुवाई हो जाती हैं।जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है।
    किसानों को बताया गया कि धान को बोने से पहले धान को 20 से 24 घंटे पूर्व पानी से भीगो कर रख देते है, जब दाना हल्का अंकुरित हो जाए तो बीज को एक से दो घंटे तक छायेदार स्थान पर रख कर सूखा ले।बीज शोधन के बाद ड्रम में भरकर लाइन में सीधी बुवाई करते है, जिससे खरपतवार एवं कीट नियंत्रण आसानी से किया जा सकता है।इस तकनीकी से किसान प्रति हेक्टर आठ से दस हजार रुपए की बचत कर सकते हैं।

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