कहीं खुशी कहीं गम, पानी ने बढ़ाई किसान की परेशानी

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ब्यूरो बहराइच मनमोहन तिवारी

बिशेश्वरगंज
बरसात के मौसम में बारिश का होना लाजमी है लेकिन अनवरत न टूटने वाले बूंदों के वाण से जनजीवन, दुकानदार, सेवारत कर्मचारियों के साथ किसान भी परेशान है ।जनपद के विकासखण्ड बिशेश्वरगंज अंतर्गत 3 दिनों से लगातार बारिश पर चर्चा की गई तो सामने आए कई प्रकार के विभिन्न तथ्य । प्रगतिशील किसान कहते है कि पानी बिना खेती असम्भव है तो मूसलाधार वर्षा का भी कोई महत्व नहीं, खेत तालाब में बदल गए है जब धान आदि की रोपाई ही नहीं कर पाएंगे तो खेती किसानी का क्या फायदा । मजदूरों का कहना है कि मनरेगा के तहत तालाब सौन्द्रीयकरण का कार्य मिला था, महामारी के लहर से कमर टूटी अब बरसात के कहर से पसली टूट रही है, कमाएंगे नही तो क्या खाएंगे । दुकानदार अपनी दुकानदारी को लेकर चिंतित है तो गरीब परिवार अपने घर मे भरे पानी से चिंतित है क्योंकि अभी कुछ दिन पहले हुए बरसात में दीवाल गिरने से कई लोगों की मौत हो गयी थी । वहीं कुछ विचारकों का मानना है कि किसान कुछ वर्षों से प्रकृति की मार बराबर झेल रहा है, बुआई से पहले बरसात, फिर सूखा उस पर रोग, रोग नियंत्रण पश्चात तैयार फसल में आगजनी और बची फसल आंगन तक पहुँचने से पहले पुनः बारिश ।इस आलम में किसान सबकुछ झेलकर अन्नदाता कहलाता है
हालांकि कुछ किसान जिन्होंने अपने खेत की रोपाई करवा दी थी उनमें खुशी का माहौल है ।आपको बता दे कि इस बार मानसून के समय से पूर्व आ जाने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है ।शुरुआती दौर की असमय बारिश और वर्तमान की लगातार बारिश के साथ उछलती लहराती हुई नहरों का पानी का मतलब भी किसान की परेशानी है ।

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