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    Homeजनपदकलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई जनपदस्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी

    कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई जनपदस्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी

    आजाद पत्र

    कुशीनगर : बुद्धवार को जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया, यह गोष्ठी फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गयी थी, उक्त गोष्ठी की अध्यक्षता जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने की।
    बैठक में मौजूद कृषक प्रतिनिधियों को कृषि अवशेष ना जलाए जाने हेतु जागरुक किया गया, कृषकों से अपने अपने क्षेत्र में फसल अवशेष ना जलाए जाने, उससे खाद और भूसा बनाएं जाने की अपील की गई। उन्हें बताया गया कि भूसे की बाजार में कीमत मिलने के साथ साथ जानवरों को खिलाने के लिए चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जागरूकता गोष्ठी में उप कृषि निदेशक बी आर मौर्या ने बताया कि जो भी कृषक पराली या कृषि अवशेष जलाते हैं उनकी मॉनिटरिंग रिमोट सेंसिंग तकनीक से होती है, अतः अनावश्यक आर्थिक दंड से बचने के लिए भी अवशेष को ना जलाया जाए।

    इस क्रम में जन जागरूकता कार्यक्रम को बैनर, पोस्टर के द्वारा विकासखंड तथा न्याय पंचायत स्तर पर भी करवाए जाने की बात हुई।

    गन्ना अधिकारी ने ने कहा कि हालांकि गन्ने के अवशेष जलाये जाने के मामले कम हैं लेकिन कुछ जगहों से गन्ने के अवशेष को भी जलाए जाने की रिपोर्ट है । इसे ना जलाया जाए क्योंकि गन्ने की पत्ती का दाम भी मिल जाता है और गन्ने का गोला पशुओं के चारा में भी इस्तेमाल होता है। उन्होंने कृषक प्रतिनिधियों से यह भी अनुरोध किया कि 15 दिसंबर के बाद गेहूं की बुवाई ना करें नहीं तो गेहूं की फसल दुष्प्रभावित हो सकती है।

    इस गोष्ठी में उपस्थित कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि कृषि की प्राचीन पद्धति सर्वश्रेष्ठ पद्धति थी, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रयोग किया जाए। वर्तमान समय में किसान पशुपालन और खाद पर जोर नहीं देते उनके लिए कृषि अवशेष जलाना आसान होता है, लेकिन अवशेष को ना जलाया जाए, कृषि अवशेष से जो भूसा मिलता है उससे मशरूम का उत्पादन भी किया जा सकता है। मशरूम प्रोटीन संपन्न होते हैं जिससे गांव की कुपोषण की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।

    गोष्ठी में मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण हेतु कृषक प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण केंद्रों के बारे में भी जानकारी ली। जिलाधिकारी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आप किसान कृषि अवशेष को नहीं जलाने में हमें सहयोग करें, अन्य किसानों तक भी यह संदेश पहुंचाएं। ऐसी स्थिति ही ना उत्पन्न हो कि पराली जलाने हेतु किसी प्रकार की कार्यवाही करनी पड़े। उन्होनें कहा कि इस प्रकार की गोष्ठियों का आयोजन हर महीने में कम से कम एक बार जरूर होना चाहिए। हर महीने हम आपसे मिलकर आपकी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करेंगे।
    इस अवसर पर कृषि अधिकारी प्यारेलाल, गन्ना अधिकारी वेद प्रकाश, विभिन्न कृषक प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारीगण भी मौजूद रहे।

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