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    कजरी के मौखिक विधाओं को संग्रहित करने का सफल प्रयास है कजरी मिमांसा – लोक गायिका मालिनी अवस्थी

    लोक गायक डा.मन्नू यादव रचित कजरी मिमांसा का लखनऊ में मालिनी अवस्थी द्वारा हुआ विमोचन

    संतोष शर्मा
    अलीनगर। नियामताबाद विकासखंड के कटरिया गांव स्थित राष्ट्रीय बिरहा अकादमी के निदेशक अंतर्राष्ट्रीय लोकगीत गायक डॉ मन्नू यादव द्वारा लिखित पुस्तक कजरी मीमांसा का विमोचन सुप्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित अपने आवास पर किया गया। इस अवसर पर मालिनी अवस्थी ने लोक संस्कृति पर प्रकाश डाला। साथ ही पुस्तक की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए अभी तक मौखिक रूप से प्रचलित कजरी के विभिन्न स्वरूपों को कजरी मीमांसा में संग्रहित किया गया है। उन्होंने कहा कि लेखक ने विभिन्न अंचलों में कजरी के प्रचलित मौखिक विधाओं को एकत्रित कर लिखने का कार्य किया है, जो एक सराहनीय पहल है। पुस्तक में रितु गीत, वर्षा के गीत कजरी, भोजली, ढुनमुनिया कजरी, झूला गीत, हिंडोला, मिर्जापुरी कजरी, डमरु बंद कजरी, कमल बंद कजरी, अष्ट बिहू मंडल कजरी आदि विधाओं को किसी पुस्तक में संग्रहित करने का यह प्रथम कार्य है। जो आने वाली पीढ़ी के लिए इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। इस मौके पर सचिवालय कर्मचारी संघ अध्यक्ष आशुतोष पांडेय, लोक गायक अशोक कुमार, लोक कवि रामजनम चंचल, आशीष प्रधान, रामचरण कवि आदि मौजूद रहे।

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