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    औषधीय एवं सगंध पौधों के पौधे सामग्री बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

    लंका। उत्तर प्रदेश के गंगा के तटीय क्षेत्रों में खास एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों के पौध सामग्री बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, नई दिल्ली (आयुष मंत्रालय भारत सरकार) द्वारा वाराणसी के राममूर्ति आई0टी0आई0 परिसर टिकरी में सी0एस0आई0आर0- सीमैप लखनऊ द्वारा आयोजित किया गया।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ प्रबोध कुमार त्रिवेदी निदेशक सी0एस0आई0आर0- सीमैप ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सीमैप द्वारा एन0एम0पी0बी0,नई दिल्ली के सहयोग से यह परियोजना वाराणसी क्षेत्र में चलाई जा रही है उसका सीधा लाभ गंगा के किनारे बसे हुए किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती एवं प्रसंस्करण में प्रशिक्षित करना है। जिससे किसान इस खेती को अपना कर उचित लाभ कमा सकता है।सीमैप द्वारा पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई सुगंधित फसलों के क्लस्टर विकसित किए हैं जिसमें काफी किसान जुड़कर लाभ कमा रहे हैं।इसी तरह वाराणसी और आस पास के क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्लस्टर विकसित किया जाएगा। जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अनिल कुमार सिंह समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् ने भी किसानों से आवाहन किया कि जो भी किसान भाई इस खेती को अपना रहे हैं वह प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने- अपने क्षेत्रों में जाकर दूसरे किसानों को भी प्रशिक्षित करें।जिससे बड़े पैमाने पर गंगा के तटीय क्षेत्रों में खास और दूसरे सुगंधित पौधों के खेती को बढ़ाया जा सकता है।इसके साथ-साथ उनके द्वारा किसानों के लिए जैविक खेती पर किए जा रहे नवीन विधियों पर भी चर्चा की।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉक्टर श्रवण पांडेय सहायक निदेशक, इग्नू, वाराणसी ने भी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में किसान औषधीय एवं सगंध पौधों के खेती को अपनाकर अपनी खेती में नए-नए परिवर्तन कर लाभ कमा रहा है तथा साथ ही साथ इनके द्वारा इन पौधों से प्राप्त उत्पाद को विश्व बाजार में निर्यात भी कर रहा है। वाराणसी तथा आसपास के किसान भी सीमैप से प्रेरित होकर औषधि और सुगंध पौधों की खेती कर लाभ कमा सकते हैं ।डॉ जितेंद्र कुमार वैश्य एन0एम0पी0बी0, नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय औषधीय एवं पादप बोर्ड की गतिविधियों से संबंधित जानकारी किसानों से साझा की।डॉ संजय कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, सीमैप, लखनऊ ने किसानों को ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए गए प्रयासों से अवगत कराया तथा किसानों को बताया कि कौन-कौन सी प्रौद्योगिकी सीमैप ने किसानों के खेतों तक पहुंचाई है। जिसका सीधा लाभ बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंच रहा है।डॉ राजेश कुमार वर्मा, प्रधान वैज्ञानिक तथा परियोजना अन्वेषक ने पिछले 2 वर्षों में गंगा के तटीय क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को किसानों से साझा किया है और कहा कि किसान इस प्रशिक्षण के बाद भी सीमा से जुड़े तथा औषधीय सगंध पौधों की खेती को आगे भविष्य में भी गंगा के तटीय क्षेत्रों में बढ़ाने के लिए योगदान दें।
    इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीमैप के वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न फसलों जैसे खास, लेमन ग्रास, तुलसी, कालमेघ, मोरिंगा, सतावर इत्यादि फसलों पर किसानों को प्रशिक्षित करेंगे तथा साथ-साथ तेलों के आसवन संशोधन का प्रदर्शन एवं तकनीकी भी किसानों से साझा करेंगे।कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन कामिनी सिंह ने दिया।
    कार्यक्रम में अमित सिंह निदेशक एस0पी0ओ0 , शोधार्थियों ज्ञान दीप शर्मा, अजय कुमार सोनकर,शैलेंद्र दांगी,प्रवीण कश्यप द्वारा भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।संगोष्ठी समापन के समय किसान भाइयो को सहजन एवं लेमन ग्राश के पौधे बितरित किए गये ।

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