इच्छा शक्तियों के दमन में संतोष रूपी शस्त्र ही सहायक: पंडित विजयलक्ष्मी

0
81

जमालपुर। क्षेत्र के बहुआर गांव के रविन्द्रालय में चल रहे नौ दिवसीय राम कथा का तीसरे दिन सोनभद्र से पधारे पं शैलेन्द्र दूबे ने दीप प्रज्जवलित करके शुभारंभ किया।

तत्पश्चात गोरखपुर से पधारी कथा वाचिका मानस कोकिला पं विजय लक्ष्मी शास्त्री ने जी ने राम जन्म व चारो भाईयों के गुरु वशिष्ठ द्वारा नामकरण की चर्चा करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा व पाप का नाश करने के लिए परमात्मा का अवतार होता है। राम जन्म की कथा सुना कर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कहा कि इच्छा शक्तियों को हरण करने के लिए मनुष्य को संतोष जैसे शस्त्र को उठाना चाहिए।लोभ मनुष्य के सभी शक्तियों के क्षरण का कारण बनता है।
रावण का जन्म अधर्म के लिए होता है तो प्रभु राम का जन्म धर्म की रक्षा के लिए होता है।धर्म की रक्षा के लिए नैमिषारण्य में मनु व सतरूपा ने एक पैर पर खडे हो कर जब हजारों वर्ष तक तपस्या किया तो उनके मन के इच्छाओं की पूर्ति के लिए आकाश मंडल से आकाशवाणी हुई।नारायण ने मनु सतरूपा से वर मागने के लिए कहा। तब मनु ने देखा कि नारायण प्रगट हो कर वर देने की बात कर रहे हैं।मनु सतरूपा ने कहा प्रभु कुछ देना ही चाहते हैं तो मुझे मोक्ष नही चाहिए।स्वयं आप अवतरित हो जाय।प्रभु त्रेता युग में आप पुत्र के रूप अवतरित हो कर नारायण नही नर रूप में आ जाना।प्रभु ने बचन दिया कहा समस्त भुमण्डल पर धर्म की रक्षा के लिए त्रेता युग में अवतार लूंगा। कहाकि पहले अधर्म जन्म लेता है तो उसका नाश करने के लिए धर्म का जन्म होता है। राम जन्म की कथा के दौरान पूरा पण्डाल राम के जय घोष से गूंज उठा।कहा कि कथा के श्रवण से मन की व्यथा दूर होती हैं।जहां कथा होती है वह भूमि पुजनीय एवं धन्य हो जाती है।बाबा तुलसीदास ने रामचरितमानस में बाबा तुलसीदास ने लिखा है कि संसार में मनुष्य का जीवन तभी सुखी है जब उसे संत का मिलन हो जाय।सुख के धाम राम है।क्रिया उपासना भक्ति राजा दशरथ की तीन रानियां है जिनके कोख से चारों भाई प्रगट होते हैं।कहा कि राम का अवतार पापियों के नाश के लिए होता है जो सुख के धाम है,भरथ जगत के भरण-पोषण करने वाले शत्रुघ्न के नाम लेने मात्र से शत्रुओं का छरण हो जाता है, लक्ष्मण शेषावतार है जो पुरे पृथ्वी का भार लेते हैं।स्थानीय कथा वाचक प्रज्ञाचक्षु श्री कैलाश जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में राम का जन्म हो जाय तो जीवन धन्य हो जाता है।कहा कि मानव तुम परिवर्तन से काहे को डरते हो जीवन में परिवर्तन जरूर होता है। इस दौरान कथा आयोजक रविप्रकाश तिवारी, अवधेश सिंह, बिजेन्दर सिंह, बबलू सिंह, नरायण सिंह, राधेश्याम तिवारी, चिन्तामणी श्रीवास्तव, श्री पति उपाध्याय, वरूण प्रकाश तिवारी, संजय पाण्डेय, अवधेश तिवारी, रामचन्द्र पाल, परमहंस पाण्डेय, पूर्व प्रधान सरिता तिवारी, बीणा उपाध्याय, मोनिका तिवारी, बानो तिवारी, माही, कुहू,परि सहित सैकड़ों नर नारी श्रोताओं ने कथा का रसास्वादन किया। राम कथा का संचालन राजेश दुबे ने किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here