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    Homeजनपदअधिवक्ताओं ने आत्मदाह के लिये सजाई चिता

    अधिवक्ताओं ने आत्मदाह के लिये सजाई चिता

    अधिवक्ताओं ने चेताया की न्यायालय भवन निर्माण जल्द शुरु किया गया तो आंदोलन का स्वरूप बदलेगा

    तारकेश्वर सिंह
    चंदौली।न्यायालय भवन निर्माण की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की लड़ाई अब जन आंदोलन के रूप लेती जा रही है।सोमवार को अधिवक्ताओं की लड़ाई को व्यापार मंडल का भी समर्थन मिल गया। उधर अधिवक्ताओं ने यदि उनकी मांगे पूरी नहीं हुयी तो सामुहिक आत्मदाह करने के सदर कचहरी में लकड़ियों की चिता सजा रखी है। चिता सजाने के लिए लकड़ी लेकर आते समय रोकने पर पुलिस के साथ नोकझोक भी हुई। वकीलों ने अधिकारियों की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ भी किया।अधिवक्ताओं ने कहा कि जनपद के विकास को लेकर अधिकारी उदासीन है।इस वजह से जनपद सृजन के 20 साल बीतने के बावजूद जिला मुख्यालय स्वरूप नहीं ले सका। न्यायिक कार्य तहसील भवन और महाविद्यालय परिसर में संचालित होता है। सरकार के अन्य विभाग किराए के भवनों में चल रहे है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जनपद के बड़े अधिकारी चाहते तो अब तक कचहरी समेत अन्य सरकारी कार्यालय बनकर तैयार हो चुके होते। अधिवक्ताओं का पिछले एक सप्ताह से धरना-प्रदर्शन चल रहा है।लेकिन अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। अभी तक न तो कोई सक्षम अधिकारी मौके पर पहुंचा और नही इस दिशा में कोई सार्थक पहल की गई। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि अतिपिछड़े जिले को और पीछे ले जाने में अधिकारियों का विशेष योगदान है। उन्हें जिले के विकास और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने से कोई सरोकार नहीं है। अधिवक्ताओं ने चेताया कि यदि जल्दी से जल्दी न्यायालय भवन निर्माण की दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।और इसकी सारी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।धरना स्थल पर राजेंद्र प्रसाद पाठक,अनिल सिंह, झन्मेजय सिंह, धनंजय सिंह, राकेशरत्न तिवारी सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

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